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हरीश चौधरी के साथ….

यंगस्टर्स विजिट श्रीनगर हिस्टोरिकल पोलो व्यू मार्केट कॉल इट यूनिक एक्सपीरियंस जम्मू कश्मीर जी-20 समिट – बदल रहा है कश्मीर, पीछे छूट रही बंदूकों की आवाज; नौजवानों की बढ़त की उम्मीद है -दिल्ली देहात से

यंगस्टर्स विजिट श्रीनगर हिस्टोरिकल पोलो व्यू मार्केट कॉल इट यूनिक एक्सपीरियंस जम्मू कश्मीर जी-20 समिट – बदल रहा है कश्मीर, पीछे छूट रही बंदूकों की आवाज;  नौजवानों की बढ़त की उम्मीद है
-दिल्ली देहात से

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जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सोमवार से जी-20 देशों के पर्यटन कार्य समूह (पर्यटन कार्य समूह) की तीसरी बैठक शुरू हुई। सम्मेलन तीन दिन तक चला। अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया गया और दर्शनीय राज्य को छोड़कर प्रदेश के दो सेंटरों से जुड़े और करीब 37 साल बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक हुई थी। भारत इस साल जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है। देश के सभी राज्यों में ये बैठकें हो रही हैं। इन शहरों में श्रीनगर को भी चुना गया है।

जी-20 की बैठक के लिए 27 देशों के 60 मेहमान तीन दिन कश्मीर को करीब से देख रहे हैं। उनके आस-पास ये बदला हुआ कश्मीर था। बीते कुछ सालों में कश्मीर में पर्यटक लौटे हैं, बल्कि 2022 में तो उन्होंने रिकॉर्ड बनाया है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन को उम्मीद है कि उनके दौरे घाटी में और निदेश आएंगे। इससे यहां रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

क्या है युवाओं की राय?
श्रीनगर के पोलो व्यू मार्केट में दोस्तों संग आए फरदीन खान स्टेटमेंट हैं, “मैं पॉलीटेक्निक की पढ़ाई कर रहा हूं। मुझे राप करना पसंद है। यहां आकर अच्छा लगता है। पहले और अब के हालात में बहुत फर्क आ गया है।” वहीं, कंप्यूटर साइंस के छात्र गुरप्रीत कहते हैं, “कश्मीर में हालात बिगड़ रहे हैं। नौजवानों की आकांक्षाएं बदली हैं।” महाराष्ट्र के पांचों से श्रीनगर वॉक्स पॉप कहते हैं, “मैं यहां नहीं रहता हूं। पोलो व्यू मार्केट के बारे में बहुत सुना था। इसलिए ये देख आ गया। आप खुद यहां की रौनक देख रहे हैं।”

कश्मीर में ज्यादा से ज्यादा निवेश लाना केंद्र का मकसद
घाटी में जी-20 की पहचान के पीछे केंद्र सरकार दुनिया को कश्मीर घाटी की खूबसूरती से वाकिफ करना चाहती थी तो ही थी। लेकिन इसके साथ ही सरकार का मकसद था कि ज्यादा से ज्यादा निवेश हाई-कश्मीर में लाया जाए। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के प्रमुख इंजीनियर प्रभावकारी बयान देते हैं, “लोग यहां अब भी सुरक्षित महसूस करते हैं। 2019 के बाद यहां उद्योग को लेकर तस्वीर काफी बदली है।”

फिर से फिल्मों की शूटिंग कर रहे हैं
एक दौर था जब हिंदुस्तान की फिल्म के शागिर्दों का मन मोह लिया था। साठ और सत्ता के दशकों की फिल्मों से हमने कश्मीर के नजारों को यादों को देखा, उनकी खूबसूरती पर हैरानी होती है। अस्सी के दशक के बाद कश्मीर का माहौल बदला, तो फिल्मों की दिशा भी बदली गई। मगर एक बार फिर पुरानी हवाएं नए रंगत के साथ लौट रही हैं। वहां फिल्में फिर से शूट की जा रही हैं। 2021 में जम्मू-कश्मीर में नई फिल्म नीति के एलान के बाद करीब 150 फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग की इज्जत ली गई। जी-20 की बैठक की पहली सत्र फिल्म पर्यटकों पर केंद्रित रही।

गुड गवर्नेंस के तहत काम में आई तेजी
पिछले चार साल में 7.7 लाख नए व्यवसाय यहां आए हैं। वाई हर रोज 527 युवा जम्मू-कश्मीर की सही तस्वीरों से जुड़े हैं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन का यह भी दावा है कि गुड गवर्नेंस के तहत 2019 के बाद यहां सरकारी नौकरियों में जल्दी आई है। 2018 में यहां 9229 प्रोजेक्ट खोले गए। 2022 में 92560 प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं।

बेशक, पिछले कुछ दिनों में गतिविधियों की खबरें भी आती रहती हैं। वहां रह रहे कश्मीरी पंडितों को राज्य छोड़ना भी पड़ा। उनमें से कई अब भी आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर माहौल बदला है। कश्मीर में पर्यटन वर्ष बढ़ रहे हैं। पर्यटन स्थलों का भी विकास किया जा रहा है।

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