दिल्ली देहात से….

हरीश चौधरी के साथ….

आज का युवा कम गहराई से अध्ययन करता है, गूगल से अधिक पीएम नरेंद्र मोदी एट नो योर लीडर प्रोग्राम – आज के युवा गहराई से कम, गूगल से विस्तृत अध्ययन करते हैं… : अपने नेता को जानें कार्यक्रम में बोले पीएम नरेंद्र मोदी -दिल्ली देहात से


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से पूछा कि यहां कौन मौजूद हैं ज्यादा लोग के रूप में और नाम बता सकते हैं? इसके बाद एक युवा ने कई लोगों के अय्यों का नाम बताया। पीएम मोदी ने कहा कि जब भी हम किसी शेख से मिलते हैं तो ग्रेब्रेट से लेना चाहिए। उसके बारे में जानने की कोशिश करनी चाहिए। उसका नाम, चेहरा, पत्र आदि को याद रखने की कोशिश करनी चाहिए। जब हम ऐसा करते हैं, तो उससे अगर पांच साल बाद भी मिलते हैं, तो उससे जुड़ी बातों को याद कर अपनापन का अधिकार कर सकते हैं। इससे लोगों को आप जैसा महसूस होता है।

उन्नीस ने पूछा कि नेताजी की वो कौन-सी चीज है, जो आप जीवन में लाना चाहेंगे? इस पर एक शख्स ने कहा कि वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की संगठन क्षमता को सीखने को तैयार नहीं हैं। नेताजी ने विश्व के भारतीयों को संगठित कर अंग्रेजों से लड़ाई की, वैसे ही हम सभी चाहे वो किसी भी अनियमित पंजाब, जम्मू-कश्मीर, केरला, पश्चिम बंगाल से होन, परस्पर देश की समस्याओं से लड़ें। इस बुजुर्ग ने कहा कि सर मैं 2015 से हर रोज सपने में बात करता हूं। आज ये सपना सच हो गया है। इसलिए सभी को सपने देखने चाहिए। मेरा सपना आज पूरा हो गया। मैं आपके सामने हूं।”

पीएम मोदी ने युवाओं से पूछा कि आज आप जिस सेंट्रल हॉल में बैठे थे, क्या उनका महत्व और इतिहास जानते हैं? इस सवाल के जवाब में एक लॉ स्‍टूडेंट ने कहा, “सर, देश के लिए यह अत्यधिक महत्‍वपूर्ण स्‍थान है, क्‍योंकि समन्वय भारत का संविधान तैयार हुआ था। एक लॉ स्‍टूडेंट होने के नाते मेरे लिए यह अत्यधिक महत्‍व रखता है।” पीएम मोदी ने बताया कि आप लोग सेंट्रल हॉल कि जिन क्लोज पर बैठे थे, उन पर कोई भी महापुरुष नहीं बैठे थे, जो संविधान में बने हुए हैं. क्या आपको ऐसा लग रहा है?

पीएम मोदी ने बताया कि बड़े नेताओं की जयंती भी पहले आ रही है। इस दिन हम कुछ लोग सेंट्रल हॉल में जाते थे, वहां उनसे जुड़े भाषणों को भी सुनने का मौका मिलता था। फिर विचार आया कि क्यों न जोखिम से इन दिनों सांसदों को संसद में बुलाया जाए। ये कल्पना और कार्यक्रम आपको कैसा लगा? इस पर पंजाब से आई बुजुर्ग परनीत ने कहा, “सर, यहां आकर हमें पता चला कि ‘विविधता में एकता’ क्‍या होती है। कारण थे। कार्य से देश के लिए आपस में संबंध बन रहे हैं। वहीं, एक युवक ने कहा, “सबसे पहले मन में ये होता था कि हम संसद को देखते हैं। वो जगह देखते हैं जहां से पूरे भारत के निर्माण की सोच पैदा होती है।”तमिलनाडु से आई रुखसाना ने कहा, “यहां आने वाला एक सपने का सच होने जैसा है, क्योंकि मैं महान देशभक्‍त सुभाष बोस को बेहद मानक हूं। वह बिल्कुल सही तरह से देश के नायक थे। मिलने का मौका मिला, जो नेताजी की तरह राष्‍ट्रभक्‍त हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि मेरा सभी युवाओं से निवेदन है कि आप जहां भी जाएं, चीजों को बेहद गुप्त तरीके से देखें, समझें और कुछ नोट भी बनाने की कोशिश करें. हमारे आस-पास बहुत कुछ हो रहा है। पढ़ने की भी आदत डालिए और हो सकती है, तो ऑटोबायोग्राफी पढ़ी। सिर्फ नेताओं की ही नहीं, हर क्षेत्र के महान लोगों की जिंदगी पढ़ी जाती है। इससे आपको लोगों के जीवन संघर्ष और तप के बारे में जानने का मौका मिलेगा। इससे आपको प्रेरणा भी मिलेगी उनके बनने की।

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