दिल्ली देहात से….

हरीश चौधरी के साथ….

गणतंत्र दिवस परेड 2023, Indian Weapons, India Security Forces : दुनिया देख रही है इन हथियारों और सुरक्षा बलों के कर्तव्य पथ पर, दुश्मनों के डर से आत्मनिर्भर भारत, Ndtv Hindi, Ndtv India – भारत के इन दांव और सुरक्षा बलों को देख खतरे में दुश्मन, पैदा करके आपको भी गर्व होगा -दिल्ली देहात से


एमबीटी अर्जुन

यह तीसरी पीढ़ी के देश में युद्धक टैंक बना है है। इसमें 120 सचाई की मुख्य राइफल गन है। 12.7 शुद्ध एंटी एयरक्राफ्ट मशीन गन है। यह 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती है।

मिसाइल सिस्टम (नामिस)

मिसाइल सिस्टम एक टैंक को नष्ट कर देता है, जिसे डीआरडीओ ने बनाया है। एक पहिया छह नाग एंटी टैंक फायर करने में सक्षम मिसाइलों का मार्गदर्शन करता है। इसकी रेंज 5 किलोमीटर है।

जीवीबीएमपी-2 (सारथ)

सारथ नाम का यह इंफ्रै कॉम्बेट व्हीकल है, जिसमें घातक हथियार होते हैं। विशेष रूप से रात में युद्ध में घातक क्षमता और वृद्धि होती है। यह हर क्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। यह 30 सचेष्ट गन, 7.62 पक्की पक्की और गलतफहमियों से ग्रस्त है।

क्यू क्यूवी (मीडियम)

क्विक रिएक्शन कॉम्बैट वाहन को आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत एडवांस सिस्टम और भारत फोर्ज ने तैयार किया है। यह गाड़ी 10 सशस्त्र सैन्य दलों को ले जा सकती है। इस वाहन को संकेत, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों को नियुक्त करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

क्यू क्यू वी (हेवी)

यह वाहन मेरा और बुलेट प्रूफ भी है। इसकी अधिकतम गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह 25 ड्रिग्री ले जाने में सक्षम है।

के-9 वज्र टैंक
15 प्रमाण पत्र /52 भौगोलिक ट्रैक्ड सेल्फ प्रोपेल्ड की फिक्सिंग रेंज 40 किलोमीटर है। यह रेगिस्तानी इलाके में 60 किमी प्रति घंटे से आगे बढ़ सकता है।

ब्रम्होस प्रक्षेपास्त्र प्रणाली

यह देश में बना सुपरसोनिक क्रूज मिस है, जिसकी रेंज 400 किमी है। यह सटीक और दुश्मन के क्षेत्र में अंदर तक लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम है।

लघु अवधि बिजिंग प्रणाली (शार्ट स्पैन ब्रिज)

10 मीटर शार्ट स्पैन ब्रिज सिस्टम एक यांत्रिक रुप से जारी लोडर ब्रिज है, जिससे कुछ नहर या नाले पर पुल तैयार कर दिया जाता है। इसे डायरेडियो बनाया गया है।

मोबाइल मैकवैन नोड और मोबाइल नेटवर्क सेंटर

इस कॉलम में दो वाहन हैं। एक माइक्रोवैव नोड और उसके साथ मोबाइल नेटवर्क सेंटर। इससे सेना को युद्ध क्षेत्र में संचार के मामले में काफी मदद मिलती है। इसे भी देश में ही तैयार किया गया है।

आकाश आर्मी

इसका कैमराडियो ने देश में ही तैयार किया है. यह दुश्मन के हवाई प्लेटफॉर्म के खिलाफ कम दूरी की सतह से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को फायर करने में सक्षम है।

स्काई आर्मीन्सर

यह प्रणाली 150 किलोमीटर तक एयरस्पेस की निगरानी करती है और 25 किलोमीटर तक अंतरिक्ष में काम करने के प्रभावी तरीके से उलझने में सक्षम है। 2019 में बालाकोट हमले के बाद इसे सीमा पर रोक दिया गया है।

मैकेनाइज्ड इंफ्रैंट्री रेजिमेंट

इसे आज की सेना में कल की रेजिमेंट के रुप में जाना जाता है। सेना में सबसे कम उम्र की रेजिमेंट है। आज यह ऐसी ताकतें बंद हो चुकी हैं, जो भविष्य में किसी भी युद्ध क्षेत्र का नक्शा पलटने के लिए तैयार हैं। इसका युद्धघोष है, “बोल भारत माता की जय”।

पंजाब रेजिमेंट सेंटर

यह भारतीय सेना की एकमात्र इन्फैंट्री रेजिमेंट है, जिसके पास नौसेना का प्रतीक चिन्ह द गली है। यह सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट इन्फैंट्री में से एक है। इसका युद्धघोष है, “जो बोले सो निहाल” “सत श्री अकाल”।

मराठा लाइट इंफ्रैंट्री

यह सेना की सबसे पुरानी और सम्मानित रेजीमेंट में से एक है। इसका गौरवशाली इतिहास 254 साल से ज्यादा पुराना है। इसकी पहली बटालियन 1768 में स्थापित की गई। ये छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरणा लेते हैं। ये युद्धघोष हैं, “बोल छत्रपति शिवाजी महाराज की जय।”

डोगरा रेजिमेंट

इस रेजीमेंट का उदय ब्रिटिश इंडियन आर्मी की 17 वी डोगरा रेजिमेंट से हुआ। डोगरा रेजिमेंट की इकाइयां आजादी के बाद के सारे जंग लड़ती हैं। इस रेजीमेंट के जवान हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब से आते हैं।

बिहार रेजीमेंट

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बिहार रेजिमेंट की पहली बटालियन की स्थापना की गई थी। इस रेजीमेंट में 50 फिसदी बिहार के और 50 फिसदी पात्र हैं। इसका युद्धघोष है, “बोल बजरंग बली की जय।”

गोरखा ब्रिगेड

गोरखा ब्रिगेड भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक मजबूती और ऐतिहासिक संबंध का प्रमाण है। फील्ड मार्शल सैम मानेकशा ने एक दफा कहा था कि अगर कोई कहता है कि वह मरने से नहीं डरता है तो वह झूठ बोल रहा है या वह गोरखा है।

असम रेजीमेंट

इस बल को भूत का शिकार भी कहा जाता है। इस दस्ते में विवरण से भर्ती किए गए सैनिक शामिल हैं, जो विविधता में एकता का उदाहरण है। 187 वर्षों के इतिहास और 994 बहादुरों के बलिदान का प्रमाण पत्र बनाया गया है।

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