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कांग्रेस नेता एके एंटनी के बेटे अनिल ने विवादास्पद बीबीसी डॉक्यूमेंट्री का विरोध किया – गलत दोष: बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर कांग्रेस नेता एके एंटनी के बेटे ने ऐतराज -दिल्ली देहात से

अनिल एंटनी का कमेंट, केरल में कांग्रेस पार्टी के रूख के विपरीत है

नई दिल्ली :

पीएम नरेंद्र मोदी बने बीबीसी की डॉक्युमेंट्री को लेकर हंगामा विवाद के बीच बीजेपी को मंगलवार को ‘अप्रत्याशित वर्ग’ का समर्थन मिला। कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और केरल के पूर्व सीएम एके एंटनी की बेटी अनिल एंटनी (अनिल के एंटनी) डॉक्‍यूमेंट्री को लेकर ऐतराज जताते हैं। इस शकी पर अपनी पार्टी और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के रुख से अलग रायजाते हुए अनिल एंटनी ने ट्वीट में लिखा, “ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर के विचार को भारतीय सट्टेबाज पर तरजीह देना, देश की संप्रभुता को ‘कमजोर’ करेंगे”

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एनडीटीवी से बात करते हुए अनिल एंटनी ने कहा, “पार्टी में शामिल होने वाले राहुल गांधी सहित कांग्रेस पार्टी में किसी के भी साथ” कोई समस्या नहीं है, लेकिन “हमारी स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में, हम विदेशियों या उनके शाश्वत को हमारी संप्रभुता को कम करने की उनका यह बयान उसी दिन आया है जब राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान जम्मू में मामले से बात करते हुए देश में डॉक्यूमेंट्री को ऑनलाइन शेयर करने से रोकने के सरकार के प्रयासों पर सवाल किए थे। राहुल ने कहा था, ”अगर आप हमारे वेदों को पढ़ेंगे, भगवद् गीता या उपनिषदों को पढ़ेंगे तो आप देखेंगे कि वहां लिखा है कि सच को छिपाया नहीं जा सकता। सच हमेशा सामने आता है।” उन्होंने कहा, ”इसलिए आप प्रेस पर पाबंदी लगा सकते हैं, उसे कर सकते हैं, आप सीसीटीवी को नियंत्रित कर सकते हैं, आप सीबीआई, ईडी आदि सब का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सच तो सच है. सच अलग छत है इसलिए किसी पाबंदी, दमन और लोगों को धमकाने से सच सामने आने से नहीं रुकेगा.”

कांग्रेस की केरल इकाई के डिजिटल संचार को संभालने वाले अनिल एंटनी का यह कमेंट, कैराल में पार्टी के रूख के विपरीत है जहां पार्टी की विभिन्न इकाइयों ने 2002 के दहाड़ पर बीबीसी की डॉक्युमेंट्री की डॉक्युमेंट्री की घोषणा की घोषणा की थी। ज़ेरोब है कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री शेयर करने वाले ने ट्वीट करके ब्लॉक करने का आदेश दिया था। बीबीसी के डॉक्यूमेंट्री के YouTube के लिंक को ट्वीट करके ट्वीट किए गए हैं, उन्हें भी ब्लॉक कर दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने इस दस्तावेज को ऐसे दुष्‍प्रचार का हिस्सा बताया था जो औप्यवेक वाणी को ज्ञात है।

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